कागज की छतरी बना के निकल पड़े बरसात में ।
और बताओ क्या करोगे तुम मेरे हालात में ।
हम निकल के चल पड़ें है जिंदगी की राह में।
हिम्मत हो जो मौत को आये हमारे साथ में ।
पूछते हो साथ में है क्यों नहीं मेरा हमसफ़र।
फर्क था कुछ उनके और मेरे ख़यालात में।
अब वो मेरे साथ है तो नाम तो होगा बहुत।
तोहमते भी आजकल मिलती नहीं खैरात में।
इश्क की हैरानिया क्या अब मुझे बतलाओगे।
अपनी हद में ही रहो न दख्ल दो हर बात में।
आशिकी के दिन जिए लम्बे बहुत तुमने ऐ दिल।
शादी तो कर बीवी फिर लाएगी औकात में ।
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