एक परिंदे की तरह उड़ के तुम्हे छू आये।
तुमसे मिलके मुझे खुद से तेरी खुशबु आये।
तुमसे मिलके जगे फिर जज़्बात मेरे
मुद्दतो बाद मेरी आँखों में आंसू आये।
तुमको देख दीवाना हुआ दर्पण मेरा,
खुद को देखू अगर तो भी नज़र तू आये।
बेतकल्लुफ हो गले तेरा यूँ मुझसे मिलना,
जैसे की रात को छुपते हुए जुगनू आये।
तुमसे राहते मिलती है परेशाँ दिल को
तेरे पहलु में समाके जो सुकून आये।
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